हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, आध्यात्मिक यात्रा के उतार-चढ़ाव भरे रास्ते में कभी-कभी इंसान को यह मार्ग कठिन दिखाई देता है और वह किसी आसान रास्ते की तलाश करता है। आयतुल्लाह मुहम्मद तक़ी बहजत सलवात को मोहब्बत बढ़ाने का सबसे आसान और साथ ही प्रभावी साधन मानते हैं। यह ज़िक्र केवल ज़ुबान से कहे जाने वाले शब्द नहीं, बल्कि दिल का वह आकर्षण है जो इंसान को अपने अज़ली महबूब की ओर खींचता है।
हज़रत आयतुल्लाह बहजत ने फ़रमाया:
“अगर कोई चाहता है कि उसकी दोस्ती और मोहब्बत बढ़ जाए, तो ज़िक्र, आदाब आदि में ज़्यादा सलवात पढ़ने से आसान कोई चीज़ नहीं है।
इंसान मोहब्बत के साथ सलवात भेजे, तो वह समझ जाएगा कि उसकी मोहब्बत किस तरह बढ़ती है। लेकिन इसके लिए यह विश्वास होना चाहिए कि वह सलवात उसे उसके अपने माबूद और महबूब की ओर ले जा रही है।”
बहजतुद्दुआ, पेज 357
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